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VAASTU SARVASVA ( Hindi )

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VAASTU SARVASVA ( Hindi )

Description

वास्तु सर्वस्व

यह सत्य है कि वेद ही समस्त प्रामाणिक शास्त्रो का आधार है I अथर्ववेद का उपवेद "स्थापत्य वेद " इस शास्त्र का उद्गम श्रोत है I कहा भी गया है कि ब्रह्माजी के मुख से ही इस शास्त्र की उत्पत्ति हुई है जो कालान्तर में मौखिक रूप से एक ऋषि से दूसरे ऋषि तक पहुची I मत्स्य पुराण के अनुसार इस शास्त्र के मूलतः: १८ उपदेशक एवं आचार्य रहे है , जिनके माध्यम से यह शास्त्र पुराणों व् आगमो में पल्लवित हुआ है I

इस विधा के अधिकांश ग्रन्थ प्रायः लुप्त हो चुके है और जो उपलब्ध है उनमे मतभेद है तथा अपूर्ण पाए गए है I वर्तमान में जो वास्तु साहित्य उपलब्ध है, उनमे विषयो का ऐसा अस्त -व्यस्त सन्निवेश है कि निशिचत अध्ययन के लिए काफी असुविधाएं होती है I  इन्ही समस्याओ के निवारण अभिप्राय से ही वास्तुशास्त्र के मूल ग्रंथो जैसे, मानसार, मयमतम, समरागण सूत्रधार, वास्तुराज वल्लभ, नारद सहिंता, विश्व कर्मा प्रकाश, वृहत संहिता, जयपृच्छा, विष्णुधर्मोत्तर, मानसोल्लास, शिल्परत्न , १४ वीं शताब्दी के दिल्ली के बादशाह अलाउद्दीन के दरबार के प्रमुख विद्वान ठक्कुर फेरु के वास्तुशास्त्र एवं प्रभाव मण्डन तथा २० शताब्दी के विद्वान आचार्य मुकुंद देवज्ञ के दुर्लभ ग्रंथो से संग्रह करके एक सम्पूर्ण एवं सुगम वास्तु ग्रन्थ " वास्तु सर्वस्व " कि रचना की गई है I 

प्रस्तुत ग्रन्थ में वास्तुशास्त्र के मूल सिधान्तो को लेकर भवन, राजभवन, देवभवन, पुर, दुर्ग, प्रतिमा, वाहन, आसन, यन्त्र, दोष निवारण वास्तु <

Specifications

Product Info
Author Shailndra sharma Daivagya
ISBN 9788188230987
Language Hindi
Pages 280
Weight 350
Product SKU: KAB0125
₹255.00
₹300.00