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Aagam Aur Tantra ( Hindi )

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Aagam Aur Tantra ( Hindi )

Description

आगम और तन्त्र

जीवन में आने वाली आधी- व्याधियो के निराकरण के लिए तन्त्र एक महत्वपूर्ण साधन है i क्योकि यह जीवन को सुखमय बनाने का सुगम उपाय है l जैन, बौद्ध, वैष्णव,शैव, सौर्य, शाक्त, गाणपत्य आदि सम्प्रदायो के अपने - अपने तन्त्र है l

तन्त्र व्यावहारिक साधन है, इसका सम्बन्ध हमारे दैनिक जीवन से जुड़ा है l एक तांत्रिक प्रसूति- पीड़ा व् सिर- दर्द निवारण के लिए मंत्र - यंन्त्र बता रहा है तो दूसरा चुनाव जीतकर मंन्त्री बनने के गुर सिख रहा है l

इस लघुकाय कृति में पाठक पायेगे - आगम और तन्त्र का स्वरूप, तन्त्र का प्रवर्तन, तन्त्र के तत्व, यन्त्र के तत्व, तन्त्र साधना की विधि, तन्त्र साधना में गुरु का स्थान और महत्व, यन्त्र मण्डल और चक्र का महत्व , चक्र - साधना, पिंड में ब्रहामंड की स्थिति का ज्ञान, तन- मन की शुद्धि के अनन्तर मन - मंदिर में देवी - देवताओ का आह्वान, दस महाविधाओं - काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता,  त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बंगलामुखी, मातंगी और कमला की उपासना l

आशा है तन्त्र के प्रति रुझान रखने वाले इस ग्रन्थ में वर्णित विषय के ज्ञान द्वारा अवश्य ही लाभान्वित होंगे l

 

Specifications

Product Info
Author Dr Brijbihari Nigam
ISBN 9788188230367
Language Hindi
Pages 182
Weight 240
Size
Product SKU: KAB0129
₹120.00
₹150.00